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इंसान को जिंदा करने वाली बूटी!

DBHIM1941 | 10/8/2009 | Author : Bhaskar News


कुल्लू. हिमाचल के कुल्लू जिला में मृत प्राणों में जान फूंकने वाली बूटी भी मौजूद है। यह बूटी कुल्लू जिले के इंद्रकील पर्वत पर स्थित है। राक्षसों के गुरू दैत्य शुक्राचार्य ने कई सौ सालों तक इंद्रकील पर्वत पर मृत संजीवनी सिद्धि प्राप्त की थी। प्राण वायु के स्थान पर उन्होंने धूंए से यह सिद्धि भगवान शंकर से प्राप्त की थी।

इससे उन्होंने 18 बार राक्षसों की मृत सेना को जिंदा किया था। संजीवनी की तलाश में हनुमान इस ओर आए थे। हनुमान टिब्बा के स्थान पर उन्होंने इंद्रकील पर्वत पर चमकदार बूटियों को देखा था। इस बूटी को लेकर कुल्लू में शोध हो रहा है। इस शोध का बीड़ा कौलांतक पीठाश्वर महायोगी सत्येंद्रनाथ ने उठाया है। इंद्रासन का वर्णन तंत्र शास्त्रों के प्रसिद्ध ग्रंथ निगम शास्त्र में भी है।

इंद्रासन पर्वत प्रदेश के 10 बड़े पहाड़ों में से एक है। जिसमें इसे पंचपीठों के बीच में स्थित बताया गया है। इन पांच पीठों में से कौलांतक पीठ, जालंधर पीठ, कुर्म पीठ, श्रीपीठ व बराहपीठ है। इसमें इंद्राकील पर्वत कौलांतक, जालंधर व कुर्म पीठ के बीच में है। महायोगी ने शोध में पाया कि वास्तव में पर्वत का नाम इंद्रकील पर्वत नहीं था। यह नाम बाद में पड़ा था।

पुराणों में है उल्लेख

मृत संजीवनी बूटी का वर्णन पुराणों में भी है। देवी भागवत पुराण के अनुसार जब राजा परीक्षित को कलियुग ने सांप का रूप धारण करके डंस लिया तो उसका बदला लेने के लिए जन्मजेय ऋषि ने सर्पयज्ञ किया। जिससे धरती पर मौजूद हर किस्म के सर्प जलने लगे। अब केवल धरती पर 19 नाग ही बचे थे।

जब तक्षक नाग की बारी आई तो वह देवताओं के राजा इंद्र के आसन से लिपटे। आसन के जलने के बाद...

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